नफ़रत की इस जंग को हम हँस के जीत जाएंगे,
मोहब्बत का परचम हम ऊँचा लहराएंगे।

ये मुल्क हमारा, हैं हम इमाराती,
अमन का पैग़ाम हम दुनिया में फैलाएंगे।

रहते हैं इस मुल्क में ऐसे आला रहबर,
हमदर्दी के क़िस्से इनके हम सबको सुनाएंगे।

हैं दिए इस मुल्क ने हमें पर और परवाज़ भी,
इस मुश्किल वक़्त में हम अपना फ़र्ज़ निभाएंगे।

लाख दहशत फैला ले ऐ दुश्मन-ए-ज़माना तू,
हम अपने गुलशन को हर बार सजाएंगे।

लेखिका – सबा फ़िरोज़