
“संवाद से सजीव अधिगम तक: ‘राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद’ में रोल प्ले की भूमिका”
रोल प्ले गतिविधि द्वारा ‘राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद’ का प्रभावी शिक्षण
कक्षा-कक्ष में यदि शिक्षण को केवल पाठ पढ़ाने तक सीमित न रखकर उसे गतिविधि-आधारित बनाया जाए, तो कठिन विषय भी विद्यार्थियों के लिए सरल और रुचिकर बन जाते हैं। इसी उद्देश्य से मैंने कक्षा 9 में हिंदी के पाठ ‘राम–लक्ष्मण–परशुराम संवाद’ को पढ़ाते समय रोल प्ले (Role Play) गतिविधि का प्रयोग किया।
‘राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद’ पाठ विद्यार्थियों को प्रारंभ में काफी कठिन लग रहा था। इसका मुख्य कारण यह था कि पाठ की भाषा अवधी है और इसमें प्रयुक्त अनेक शब्द एवं वाक्य-विन्यास विद्यार्थियों के लिए सहज और परिचित नहीं थे। विद्यार्थी पाठ को पढ़ तो रहे थे, लेकिन उसके भाव, कथानक और पात्रों के संवाद को पूरी तरह समझने में कठिनाई अनुभव कर रहे थे। केवल पाठ का अर्थ समझाने और व्याख्या करने से भी विद्यार्थियों की रुचि अपेक्षित स्तर तक विकसित नहीं हो पा रही थी।
इस समस्या को ध्यान में रखते हुए मैंने विद्यार्थियों को पाठ पढ़ाने के बाद रोल प्ले गतिविधि करवाने का निर्णय लिया। विद्यार्थियों को राम, लक्ष्मण, परशुराम आदि पात्रों की भूमिकाएँ दी गईं। उन्हें पाठ के संवादों को ध्यानपूर्वक पढ़ने, उनके भाव को समझने और पात्रों के अनुसार संवाद प्रस्तुत करने के लिए प्रेरित किया गया।
जब विद्यार्थियों ने संवादों को पात्रों के रूप में प्रस्तुत करना शुरू किया, तो पाठ उनके लिए जीवंत हो गया। वे केवल शब्दों को पढ़ने के बजाय यह समझने लगे कि कौन–सा पात्र क्या कह रहा है, क्यों कह रहा है और उस समय उसकी मनःस्थिति क्या है। इस गतिविधि के माध्यम से विद्यार्थियों ने पाठ के कथानक और पात्रों के बीच होने वाले संवाद को बहुत अच्छे ढंग से समझा।
रोल प्ले के दौरान विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक अपनी भूमिकाएँ निभाईं। उन्होंने संवादों को भाव-भंगिमा, हाव-भाव और उचित आवाज़ के उतार-चढ़ाव के साथ प्रस्तुत किया। इससे कठिन लगने वाला पाठ उनके लिए रोचक और सरल बन गया। विद्यार्थियों ने न केवल पाठ की विषय-वस्तु को समझा, बल्कि उसके भाव और संदेश को भी प्रभावी रूप से आत्मसात किया।
इस गतिविधि का एक महत्वपूर्ण लाभ यह रहा कि विद्यार्थियों को संवाद करने का व्यावहारिक अभ्यास मिला। उन्होंने अपने विचारों को स्पष्ट रूप से व्यक्त करना, दूसरों की बात ध्यानपूर्वक सुनना तथा परिस्थिति के अनुसार प्रतिक्रिया देना सीखा। इसके साथ ही, मंच के सामने अपनी भूमिका प्रस्तुत करने से उनमें आत्मविश्वास का विकास हुआ। जो विद्यार्थी सामान्यतः कक्षा में बोलने से झिझकते थे, उन्होंने भी उत्साह के साथ भाग लिया।
रोल प्ले ने विद्यार्थियों में सहयोग, सहभागिता, अभिव्यक्ति–कौशल, रचनात्मकता और नेतृत्व क्षमता को भी विकसित किया। विद्यार्थियों ने एक-दूसरे की सहायता करते हुए संवाद याद किए और पात्रों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने का प्रयास किया। इस प्रकार पूरी कक्षा एक सक्रिय और आनंदपूर्ण अधिगम वातावरण में बदल गई।
निष्कर्ष
इस गतिविधि के अनुभव से यह स्पष्ट हुआ कि गतिविधि–आधारित शिक्षण कठिन साहित्यिक पाठों को भी सरल, रोचक और प्रभावी बना सकता है। ‘राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद’ जैसे भाषा की दृष्टि से कठिन पाठ को रोल प्ले के माध्यम से पढ़ाने से विद्यार्थियों ने पाठ को केवल पढ़ा नहीं, बल्कि उसे समझा, अनुभव किया और प्रस्तुत किया।
इस प्रकार रोल प्ले विद्यार्थियों के लिए केवल मनोरंजन की गतिविधि नहीं रही, बल्कि यह एक प्रभावी शिक्षण–अधिगम रणनीति सिद्ध हुई, जिसने पाठ की समझ के साथ-साथ विद्यार्थियों के संवाद कौशल और आत्मविश्वास को भी मजबूत किया।
